🌟 हार मत मानना
राह कठिन हो, पाँव थकें तो,
फिर भी तुम रुकना मत।
आँधी आए, तूफ़ाँ आए,
हिम्मत अपनी झुकना मत।
छोटी-सी कोशिश से ही तो,
बड़े-बड़े परिणाम मिलते हैं।
जो गिरकर फिर उठ जाते हैं,
उनको ही सम्मान मिलते हैं।
सूरज रोज़ यही कहता है,
“अँधियारे से डरना मत।”
रात भले ही लंबी हो पर,
उम्मीदों को मरना मत।
लोग कहें तुमसे—“नहीं होगा”,
उनकी बातों में आना मत।
अपने सपनों की खातिर तुम,
खुद पर शक कर जाना मत।
आज अगर तुम पीछे हो तो,
कल सबसे आगे हो सकते हो।
मेहनत की राह पकड़ लो अगर,
तुम भी सितारे हो सकते हो।
पढ़ना है तो मन से पढ़ना,
सीखो हर दिन कुछ नया।
गलती हो तो उससे सीखो,
गलती से कभी डरना क्या?
मंज़िल उनको मिलती है जो,
रास्तों से लड़ जाते हैं।
मुश्किल चाहे जितनी आए,
कदम बढ़ाकर बढ़ जाते हैं।
तुम भारत के बच्चे हो,
तुममें नई उड़ान है।
तुमसे ही तो देश का कल है,
तुममें हिंदुस्तान है।
इसलिए बस इतना याद रखो—
चाहे कैसी हो परिस्थिति,
मेहनत, साहस, सच्चाई से
बदल सकती है अपनी नियति।
तो आज से एक प्रण कर लो—
हार कभी स्वीकार नहीं।
जब तक मंज़िल मिल न जाए,
कोशिश होगी बेकार नहीं।
✨ संदेश
“सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए हम हर दिन ईमानदारी से मेहनत करते हैं।”
Comments (1)
‘हार मत मानना’ कविता प्रेरणादायक कविता है। इसमें कवि ने मनुष्य को कठिन परिस्थितियों और असफलताओं से घबराए बिना निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया है। जीवन में अनेक बाधाएँ आती हैं, लेकिन हमें धैर्य और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करना चाहिए। सफलता पाने के लिए मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं। कविता हमें सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक कदम है। इसलिए हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
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